छोड़ आये हम, वो गलियां

वो मेरा देश, वो शहर
वो गलियां, वो मैदान, मेरे दोस्त, मेरा घर
कल ही तो छोड़े थे मैंने
फिर भी अनजान बने ऐसे जैसे बीती हो उमर.

वक्त के आंचल में सिमट गईं थीं यादें मेरी
ले गयी उनको बहाकर बदलने की लहर
अब आया हूं तो पाया कुछ नहीं वैसा
वक्त ठहरा नहीं जिस मोड़ पर गया था मैं ठहर

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